Tuesday, March 26, 2013

हम होली क्यों मनाते है

होली के पर्व से अनेक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी है प्रह्लाद की।

माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। अपने बल के दर्प में वह स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर भक्त था। प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकशिपु ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, पर प्रह्लाद बच गया। ईश्वर भक्त प्रह्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है। प्रतीक रूप से यह भी माना जता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्लाद (आनंद) अक्षुण्ण रहता है।

निवेदन : होली के दिन कई लोग नशा और मांस का सेवन करते है कृपया यैसा ना करे करने से पहले ये पोस्ट जरुर पढ़े click link  " http://bindasspost.blogspot.in/2013/03/drinkers.html  "
               
आप सभी को होली की हार्दिक शुभ कामनाये 

                

अगर आप को ये पोस्ट अच्छा लगा हो तो आप हमे coment के माध्यम से जरुर बताये ! दोस्तों आप से उम्मीद करता हु कि इस blog को आप सभी follow/join अवश्य करेगे ! Join कर हमे अपना सहयोग दे!
"जय हिन्द जय भारत "  


No comments:

Post a Comment

आप अपने सुझाव हमें जरुर दे ....
आप के हर सुझाव का हम दिल से स्वागत करते है !!!!!