Wednesday, April 24, 2013

भारतीय जनतंत्र



कैसा हो गया यह जनतंत्र,
कहा गये जन, कैसे अलग हो गया यह तंत्र,
बदल गयी सारी परिभाषाए ,
अमीरों के हाथ में अब यह तंत्र है !

इस जन तंत्र में जनता है कहा,
आज भी झोपड़ियो में है पड़ी ,
जनता के प्रतिनिधि करते यहा राज है,
जनता की ही बात सुनने को ही वक्त नही !

आते है वोटो के लिए ,
उसके बाद जनता से ही मतलब नही,
कैसा हो गया यह जनतंत्र,
कहा गये जन कैसे अलग हो गया यह तंत्र !

घूस के बिना होता न कोई काम है,
हर तरफ धोखा-धड़ी घोटालो का नाम है,
इस तंत्र की विगड़ रही सारी ब्यवस्था,
गरीबो का रहा कहा यह जनतंत्र है !

कोई खाता रोज इमरती,
कोई सुखी रोटी को बेहाल है,
किसी के पास सौ - सौ कारो का अम्बार है,
इस जनतंत्र की महिमा अपार है !



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"जय हिन्द जय भारत " 

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