Thursday, May 23, 2013

सीख वा को दीजिये जा को सीख सुहाय







यदि किसी को अच्छी और हितकारी बात भी अच्छी नहीं लगती तो इसका मतलब यही होगा कि वह व्यक्ति अच्छा नहीं है क्योकि जो जैसा होता है वैसी ही पसंद भी रखता है जैसे अच्छे स्वभाव और सदाचारी व्यक्ति को बुरी बाते अच्छी नहीं लगती, वैसे बुरा व्यक्ति अच्छी बात का विरोध करता है अवहेलना करता है ! यदि वह क्रोधी स्वभाव का तथा हीन भावना से ग्रस्त हो तो उग्र कार्यवाही भी कर बैठता है इसलिए अच्छी शिक्षा सुपात्र और ऐसे इच्छुक व्यक्ति को ही दी जानी चाहिए, जिसे शिक्षा अच्छी लगती हो ! आपने बया पक्षी का नाम सुना ही होगा अन्य पक्षियों के घोसले का द्वार ऊपर की तरफ होता है जबकि बया पक्षियों के घोसले का द्वार निचे की तरफ है ऊपर से घोसला ढका हुआ गुमद के आकार का और बहुत ही बारीक़ तिनको से बना हुआ होने से इतना सघन होता है की वर्षा का पानी और सूरज के धुप का इसमे प्रवेश नहीं होता और बया अपने परिवार सहित वर्षा व् धुप से इस घोसले में सुरक्षित रहती है ! एक बार झमाझम वर्षा हो रही थी तब एक बन्दर वर्षा में भीगता हुआ उसी वृक्ष की डाली पे आ बैठा जिसकी एक डाल पर बया का घोसला लटक रहा था ठंडी हवा और वर्षा के पानी से भीगता तथा कापते हुए बन्दर की दुर्दशा देख कर बया ने कहा जो समय रहते जरूरी और उचित काम नही कर लेते उसकी ऐसी ही दुर्दशा होती है जैसे एस समय तुम्हारी हो रही है मुझे देखो मैने वर्षा से पहले ही अपना घोसला बना लिया था तो कैसे मजे से सुरक्षित बैठा हु बन्दर को बया का यह उपदेश अच्छा नही लगा ! गुस्साकर उसने घोसले को तोड़ कर जमीन पर फेक दिया यह सब देख कर बया ने कहा -

"सीख 'वा' को दीजिए जा को सीख सुहाय !
सीख न दीजै बानरा, जो घर बया को ढाए  !!"

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"जय हिन्द जय भारत " 

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