Sunday, June 30, 2013

What is Gita



“Live in the world but don’t be of the world. Live in the world but  don’t let the world live within you. Remember it is all a beautiful dream,  because everything is changing and disappearing. If you become detached you  will be able to see how people are attached to trivia and how much they are  suffering. And you will laugh at yourself because you were also in the same  boat before”. - Osho

What  is the Gita?

The  dictionary meaning of the word ‘Gita’ is a song or poem containing an inspired doctrine  and the word ‘Bhagavat’ means a blessed or adorable or venerable or divine One.  Hence Srimad Bhagavad Gita is variously called as ‘The Song of God’, ‘The  Divine Song’, ‘A Song of Fortune’, ‘The Lord’s Song’, ‘The Holy Song of God’, ‘The Song of  the Lord’,Gudartha Deepika, Gita Rahasya, Jnaneshwari, Bhavaarthadipika,  Sadhaka Sanjeevani and so on. The noted English poet, journalist and a Principal of the Government Sanskrit College  at Pune, Sir Edwin Arnold (1832-1904) called  his famous poetic version of the Bhagavad Gita as ‘The Song Celestial’.  The Bhagavad Gita’s another title is ‘moksha  sastra’or ‘Scripture of Liberation’. However, it is more popularly known  as “The Gita”.

The  Bhagavad Gita is a sacred Hindu scripture, considered among the most important  texts in the history of literature and philosophy. It finds a place in the Bhishma  Parva of the Mahabharata. It comprises of 18 chapters spread out in 700 verses.  Its author is Veda Vyasa, the compiler of the Mahabharata who wrote this epic  through the hands of the Lord of Wisdom, Sri Ganesha. Its teachings are  considered timeless and the exact time of revelation of the scripture is  considered of little spiritual significance. The teacher of the Bhagavad Gita  is Lord Krishna, who is revered as a manifestation of God, The Bhagvan,  Parabrahman.

The  content of the Gita is the conversation between Lord Krishna and Arjuna taking  place on the battlefield of Kurukshetra before the start of the war between the  two clans of brothers - the Kauravas and the Pandavas.

Responding  to Arjuna's confusion and moral dilemma about fighting his own cousins, Bhagavan  Krishna explains to Arjuna his duties as a warrior and prince and elaborates on  different Vedantic concepts. This has led to the Gita being described as one of  the prasthana traya, the triumvirate of the canons of Hindu Philosophy,  the other two being the Upanishads and the Brahma Sutras.

It  is considered as a concise, practical, self-contained guide to play the game of  life. During the discourse, Krishna reveals His  identity as the Supreme Being (Svayam Bhagavan), blessing Arjuna with an  awe-inspiring vision of His divine universal form.

The  Gita itself tells us about what it is. At the end of the first chapter we find  a narration reading as under:  
    om tat sat 
    iti srimad bhagavadgeetaasu upanishatsu  brahma vidyaayaam yogashaastre 
    sri krishnaarjuna samvaade arjuna  vishaada yogo naama prathamo'dyaayah||

“Thus  in the Upanishads of the glorious Bhagavad Gita, the science of the Eternal,  the scripture of Yoga, the dialogue between Sri Krishna and Arjuna, ends  the  first discourse entitled: The  Yoga   of the Despondency of Arjuna”

Srimad Bhagavad Gita


नदी जिसे हम माँ कहते है

ये है हमारे हिंदुस्तान ( INDIA ) की नदिया जो करोणों अरबो साल से हमारे पूर्वजो ने इसे सवारा इनकी पूजा अर्चना की और और माँ माना और एक हम है जो माँ तो मानते है पर इनके लिए शायद हमारे अंदर कोई आस्था नही बची तभी तो हम केवल माँ समान नदियों का misuse कर रहे है ! नदियों का दोहन इतना ज्यादा अधिक हो गया है की अब नदिया सूखती चली जा रही है ! जो नदिया कभी निर्मल धारा में लगातार बहा करती थी लेकिन आज हम उनपर बाध बना के उन नदियों को पोखरे में तब्दील कर दे रहे है भला इन नदियों को कोई रोक पाया है पर ना जाने हमे किस बात का घमंड और गर्व हम development के नाम पे केवल ढकोशलेबाजी ही कर रहे है इसका सीधा सा Example उतराखंड में आयी भयानक तबाही है हम ईश्वर और नदियों, पहाड़ो को दोष नहीं दे सकते जिन प्रकृति को ईश्वर ने इतने प्यार से बनाया उससे किसी को खिलवाड़ नहीं करनी चाहिए! अगर हम नहीं माने तो आने वाले time में इससे भी भयानक त्रासदी देखने को तैयार रहना चाहिए ! हम development करे development करना कोई गलत नहीं पर अपने प्रकृति से खिलवाड़ कर के नही, यैसा development आगे चल कर हमे ही नुकसान पहुचाता है !

हिंदुस्तान की कुछ प्रमुख नदिया 



गंगा (हरिद्वार)

गोदावरी 


नर्मदा 


सुत्लज 


घाघरा 


यमुना 
               
                               ये सारे फोटो पुराने है आज की हालत यैसी है की किसी भी नदी में पैर धोने लायक नहीं इतनी गंदी नदिया हो गयी है हमारी हमे इन नदियों को पहले की तरह बनाने के लिए उसी श्रध्धा भाव से लगना होगा जैसे हमारे पूर्वज नदियों को पूजते थे उनका ख्याल रखते थे तब जा के हमारी माँ रूपी नदिया इस तरह से दुबारा जीवित हो के हमे एक स्वस्थ जिन्दगी देगी ................

जय हिन्द जय भारत ...............


Friday, June 28, 2013

Narendra Modi vs Manmohan Singh



डालर और रुपये की समय समय पर कीमत::
1947 में 1 डालर = 1.00 रूपये
1966 में 1 डालर = 7.50 रूपये
1975 में 1 डालर = 8.40 रूपये
1984 में 1 डालर = 12.36 रूपये 1990 में 1 डालर = 17.50 रूपये
1991 में 1 डालर = 24.58 रूपये
1992 में 1 डालर = 28.97 रूपये
1995 में 1 डालर = 34.96 रूपये
2000 में 1 डालर = 46.78 रूपये
2001 में 1 डालर = 47.93 रूपये 2002 में 1 डालर = 48.98 रूपये
2003 में 1 डालर = 45.57 रूपये
2004 में 1 डालर = 43.84 रूपये
2005 में 1 डालर = 46.11 रूपये
2007 में 1 डालर = 44.25 रूपये
2008 में 1 डालर = 49.82 रूपये 2009 में 1 डालर = 46.29 रूपये
2010 में 1 डालर = 45.09 रूपये
2011 में 1 डालर = 51.10 रूपये
2012 में 1 डालर = 54.47 रूपय
2013 में 1 डालर =60.71 रूपये
1991 से मनमोहन विश्व बैक के कर्मचारी बने और तब से लेकर अब तक रूपये की वैल्यू में 3 गुना से अधिक
कमज़ोरी आई है !!
" GUJRAT '' government is declared 2nd best state
government in the
world as announced by International council of UN.
Before 10 Yrs they had 50,000 crores loan in World Bank.
But Today they have deposited 1 lac Crores in World
Bank.
In Gujrat :
'' NO BAR ''
'' NO POWER CUT '' '' 100% LADIES STUDYING ''
'' WHOLE INDIA EXPORT 15% FROM GUJRAT ''
'' 30% OF INDIAN SHARE MARKET INVESTS BY
GUJRAT''
'' TATA, HYUNDAI, FORD, RELIANCE, HONDA, BMW,
NOKIA all in GUJRAT ''
After 10 yrs it will beat Singapore .
Think who is Real INDIAN IDOL ?
Rahul Gandhi or
Gujrat CM NARENDRA MODI ?
Uttar Pardesh.muslim m.L.A. 1993 me 27
1996 me 38
2002 me 45
2007 me 55
Aur ab
2012 me 68 Muslim M.L.A. Chune gaye. Kya hoga U.P ka 2050 me dusra Pakistan ?
Akhir Modi P. M. kyu nahi?
Jago HINDU jago..
Abhi nahi to kabhi Nahi
Agar sachhe HINDU ho to is msg ko aag ki tarha fela
do. "Vande Matram....

Mahabharata Quiz


Ans :- 2- माद्री 


Ans :- 3- इन्द्र


Ans :-  1-सूर्यास्त से पहले


Ans :- 4- भीमसात्वत


Ans :- 1- युयुत्सु



Ans :-  2- रेवती

Wednesday, June 26, 2013

बच्चा मिटटी खा रहा है

          एक बच्चे को मिटटी खाता देखकर मैने उसके बाप से कहा कि आपका बच्चा मिटटी खा रहा है !
उत्तर में उसने कहा,"खाने दो तुम्हारे बाप का क्या जा रहा है ! बच्चा अपना भविष्य बना रहा है !
मैने पूछा वह कैसे ?
         
           बाप बोला,"इसे पढ़ायेगे, लिखायेगे, बहुत बड़ा civil engineering बनायेगे ! फिर यह हजारो टन छड़, सीमेंट, गिट्टी खा जायेगा ! आसानी से पचायेगा, डकार भी न लेगा !
         
            मान लो यह पढ़ न सका तो नेता बन जायेगा ! तब तो और मजा आ जायेगा ! आज मिटटी खा रहा है, कल पुरे देश को खा जायेगा ! 

अगर आप की कलम भी कुछ कहती है तो आप भी अपने लेख हमे भेज सकते है ! हमारा Email id - bindasspost.in@gmail.com 

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"जय हिन्द जय भारत''   

Friday, June 21, 2013

अर्जुनविषादयोग

दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः ।
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः ॥

भावार्थ :  इन वर्णसंकरकारक दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल-धर्म और जाति-धर्म नष्ट हो जाते हैं॥43॥

उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन ।
नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ॥

भावार्थ :  हे जनार्दन! जिनका कुल-धर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्यों का अनिश्चितकाल तक नरक में वास होता है, ऐसा हम सुनते आए हैं॥44॥

अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम्‌ ।
यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः ॥

भावार्थ :  हा! शोक! हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान पाप करने को तैयार हो गए हैं, जो राज्य और सुख के लोभ से स्वजनों को मारने के लिए उद्यत हो गए हैं॥45॥

यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः ।
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत्‌ ॥

भावार्थ :   यदि मुझ शस्त्ररहित एवं सामना न करने वाले को शस्त्र हाथ में लिए हुए धृतराष्ट्र के पुत्र रण में मार डालें तो वह मारना भी मेरे लिए अधिक कल्याणकारक होगा॥46॥

संजय उवाच

एवमुक्त्वार्जुनः सङ्‍ख्ये रथोपस्थ उपाविशत्‌ ।
विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः ॥

भावार्थ :  संजय बोले- रणभूमि में शोक से उद्विग्न मन वाले अर्जुन इस प्रकार कहकर, बाणसहित धनुष को त्यागकर रथ के पिछले भाग में बैठ गए॥47॥

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पढो तो एसे पढो भाग - 4



1- हम जितनी भी चीजो को पढ़ते है, हमारे पढने के उद्देश्य उतने ही अलग-अलग होते है !

2- हमारी आँखे हमारे मस्तिष्क रूपी कैमरे का लेंस होती है !

3- जो हमारी आँखों को अच्छी लगती है और हमारे मन को प्रसन्न करती है, वह हमारे मस्तिष्क पर भी
    सकारात्मक प्रभाव डालती है !

4- साहस की धारा हमेशा संकल्प की गंगोत्री से ही फूटती है !

5- जब आप पढ़ते है तो आपका मन आपको धोखा देकर आपसे पूछे बिना आपको छोड़कर कही और चला
    जाता है !

6- यदि आप एक पैराग्राफ भूलते है, तो मै समझता हु कि उस टापिक की पूरी व्यवस्था को नष्ट कर देते है !

7- हमे जिन बातो से चिढ हो जाती है, उन बातो को हमारा मस्तिष्क अच्छी तरह स्वीकार नहीं करता !

8- किसी विषय के प्रति भय या उसके प्रति होने वाली चिढ से मुक्त होने का सरल और प्रभावकारी उपाय है-
    उसका अभ्यास करना, निरंतर अभ्यास करते रहना !

9- रोज कुछ न कुछ पढिये, भले ही उसमे मन न लगे !

10- कोशिश कीजिये कि आपको कोई येसा दोस्त मिले जिससे आप अपने पढ़े गये विषय पर अगले दिन चर्चा
      कर सके !

         यह भी पढ़े :-


    

Monday, June 17, 2013

जीवन एक क्रिकेट है



सृष्टि के महान स्टेडियम में धरती की विराट पिच पर ,
समय बालिंग कर रहा है , समय बल्लेबाज है !
ईश्वर के इस आयोजन में एम्पायर धर्मराज है !
बीमारियाँ फिल्डिंग कर रही है !
विकेट कीपर यमराज है !
प्राण हमारी विकेट है !
जीवन एक क्रिकेट है .................................. !

इस Day - Night के Mach में रचनात्मक जलवे दिखाने है !
सांसो के सीमित ओवर में, सृजन के रन बनाने है !
गिल्लिया बिखर जाने का मतलब सांसे टूट जाना है !
L.P.W. यानी  Hart attack
दुर्घटना में मरना, run out हो जाना है !
Benefit of doubt नहीं रहता,
यहा कोई not out नहीं रहता !
Border पर शहीद होने वाला catch out है !
आत्महत्या का मतलब hit wicket हो जाना है !
हत्या का अर्थ स्टम्प out माना है !
हालांकि कुछ आक्रामक खिलाडी,
जल्दी पैवेलियन लौट जाते है !
लेकिन पारी यैसी खेलते है,
कि कीर्तिमान बना जाते है !
अपना-अपना run rat है ----- जीवन एक क्रिकेट है !!!!!!!!!!!!!!


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Saturday, June 8, 2013

पूरा हिंदुस्तान हुआ मोदी - मय


                                  आज के दिन में किसी भी पार्टी में मोदी जी से बड़ा नेता कोई नही है और मोदी जी देश में ही नहीं विदेशो में भी Popular होते जा रहे है ! इनको लाखो करोणों चाहने वाले लोग सडको के साथ -2 Social media में भी खूब सक्रिय है ! मोदी जी, "अटल बिहारी वाजपेयी जी " के बाद दुसरे यैसे नेता है जो खुद अपनी मेहनत से इतनी Popularity पायी है ! आज मोदी जी के आगे बढने से कांग्रेस के साथ और भी पार्टिया पूरी तरह डरी हुई है सभी पार्टिया अच्छे से जानती है अगर मोदी जी केंद्र में आते है तो पूरी तरह Vote का धुर्विक्र्ण होगा ! ये सब जानते है कि लोग या तो मोदी जी को चाहते है या उनसे नफरत करते है पर नजरंदाज कोई नहीं करता ! इनके Speech को लोग ध्यान से सुनते है ! इसका साफ - साफ मतलब है कि मोदी जी के अंदर येसी क्षमता है जो Good Governance इस देश को दे सके और मोदी जी ने गुजरात मे यह कर दिखाया है जिसके कारण हिन्दू Voter ही नहीं मुस्लिम Voter भी आज मोदी जी के साथ खड़े दिखाई देते है ! कांग्रेस ने गुजरात के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम Voter को डराने, भडकाने की कोशिश की और इस काम में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी भी पीछे नही थे इन्होने भी अपने Speech में मोदी जी को मुस्लिमो का दुश्मन बताने की कोशिश की पर गुजरात में मुस्लिम खुल कर मोदी जी का साथ दिया ये दिखाता है कि गुजरात के मुस्लिम मोदी जी से कितना प्यार करते है और ये अचानक नही हुआ ये मोदी जी का Good Governance है जो विरोधियो को भी दोस्त बनने के लिए उत्सुकता प्रदान करता है ! आज अगर Girls पूरी तरह सुरक्षित है तो ओ गुजरात है जहा Girls रात के   बारह बजे को भी आसानी से बिना डरे घूम सकती है ! औद्योगीकरण में भी गुजरात आगे निकलता जा रहा है! देश को बहुत उम्मीद है मोदी जी से खास कर आज का युवा वर्ग ये चाहता है प्रधानमंत्री के पटल पर मोदी जी हो और पूरी भाजपा ( B.J.P.) मोदी का समर्थन कर उन्हें आगे बढाये अगर पूरी B.J.P. मोदी जी के साथ खड़ी हो जाये तो B.J.P. को केंद्र में आने से कोई नहीं रोक सकता ! लालकृष्ण अडवाणी जी और मोदी जी को चाहिए की अपने बीच के सारी खाई को दफन कर गले मिल जाये और पुरे हिंदुस्तान को ये संदेश दे कि B.J.P. पूरी तरह मोदी जी के साथ खड़ी है !
"माना कि अँधेरा घना है,
                  लेकिन दीया जलाना कहा मना है ?...मोदी जी 
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फर्क थोडा सा है मेरे और तेरे इश्क में 
तू माशूक की खातिर रात भर जगता है 
    और मुझे मात्रभूमि के हालात सोने नहीं देते !!
 .............................................................................................................................

Thursday, June 6, 2013

The Life Game

BALANCE SHEET Of LIFE:-




- What comes to you is credit
- What goes from you is debit
- Birth is your opening stock
- Death is your closing stock
- Your ideas are your assets
- Your views are your liabilities
- Your happiness is your profit
- Your sorrow is your loss
- Your soul is your goodwill
- Your heart is your fiixed assests
- Your duties are your outstanding expennses
- Your friendship is your hidden adjustment
- Your character is your capital
- Your knowledge is your investment
- Your patience is your bank balance
- Your thinking is your current account
- Your behaviour is your journal entry
- Bad things you should always depreciate

- And every good things you should always appreciate

अर्जुनविषादयोग

निमित्तानि पश्यामि विपरीतानि केशव
श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे


भावार्थ : हे केशव! मैं लक्षणों को भी विपरीत ही देख रहा हूँ तथा युद्ध में स्वजन-समुदाय को मारकर कल्याण भी नहीं देखता॥31

न काङ्‍क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च ।
किं नो राज्येन गोविंद किं भोगैर्जीवितेन वा ॥



भावार्थ : हे कृष्ण! मैं तो विजय चाहता हूँ और राज्य तथा सुखों को ही। हे गोविंद! हमें ऐसे राज्य से क्या प्रयोजन है अथवा ऐसे भोगों से और जीवन से भी क्या लाभ है?32

येषामर्थे काङक्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि
इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि



भावार्थ : हमें जिनके लिए राज्य, भोग और सुखादि अभीष्ट हैं, वे ही ये सब धन और जीवन की आशा को त्यागकर युद्ध में खड़े हैं॥33

आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव पितामहाः
मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः संबंधिनस्तथा
 


भावार्थ : गुरुजन, ताऊ-चाचे, लड़के और उसी प्रकार दादे, मामे, ससुर, पौत्र, साले तथा और भी संबंधी लोग हैं 34

एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन ।
अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ॥



भावार्थ : हे मधुसूदन! मुझे मारने पर भी अथवा तीनों लोकों के राज्य के लिए भी मैं इन सबको मारना नहीं चाहता, फिर पृथ्वी के लिए तो कहना ही क्या है?35

निहत्य धार्तराष्ट्रान्न का प्रीतिः स्याज्जनार्दन
पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः
 


भावार्थ : हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता होगी? इन आततायियों को मारकर तो हमें पाप ही लगेगा॥36

तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान्‌ ।
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव
 


भावार्थ : अतएव हे माधव! अपने ही बान्धव धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारने के लिए हम योग्य नहीं हैं क्योंकि अपने ही कुटुम्ब को मारकर हम कैसे सुखी होंगे?37

यद्यप्येते पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः
कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे पातकम्
कथं ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन



भावार्थ : यद्यपि लोभ से भ्रष्टचित्त हुए ये लोग कुल के नाश से उत्पन्न दोष को और मित्रों से विरोध करने में पाप को नहीं देखते, तो भी हे जनार्दन! कुल के नाश से उत्पन्न दोष को जानने वाले हम लोगों को इस पाप से हटने के लिए क्यों नहीं विचार करना चाहिए?38-39

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः ।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत
 


भावार्थ : कुल के नाश से सनातन कुल-धर्म नष्ट हो जाते हैं तथा धर्म का नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में पाप भी बहुत फैल जाता है॥40

अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसंकरः 41



भावार्थ : हे कृष्ण! पाप के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ अत्यन्त दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय! स्त्रियों के दूषित हो जाने पर वर्णसंकर उत्पन्न होता है॥41


संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य
पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः



भावार्थ : वर्णसंकर कुलघातियों को और कुल को नरक में ले जाने के लिए ही होता है। लुप्त हुई पिण्ड और जल की क्रिया वाले अर्थात श्राद्ध और तर्पण से वंचित इनके पितर लोग भी अधोगति को प्राप्त होते हैं॥42


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