Saturday, July 5, 2014

मै तो हु मुसाफिर



मुसाफिर हूँ चलता चला जा रहा हु ! 
रास्ते कई है सफर में फिर भी, 
मंजिल की तरफ बढ़ता चला जा रहा हु, 
मिल रहे है तरह - तरह के लोग, 
कोई साथ चल कर खुश है, 
तो कोई दुरी बना कर खुश है !!!

मै तो हु मुसाफिर ..........  
मन्ज़िल क़ी तऱफ बढते चला ज रहा हु  !!!

जान  लो समझ लो मेरे दोस्त !
आज ही तय कर लो  मंजिल अपने, 
तेजी से चल रहा है समय का पहिया, 
दौड़ पड़ो कूद पड़ों इस मैदाने जंग में, 
आज ही तय कर लो  मंजिल अपने, 
कही ऐसा न हो की पछताना पड़े, 
चारो ओर गाली सुनते जाना पड़े, 
तो आज ही तय कर लो  मंजिल अपने,
क्योकि तेजी से चल रहा है समय का पहिया !!! 

मै  तो हु मुसाफिर ..........  
मन्ज़िल क़ी तऱफ बढते चला ज रहा हु  !!!

 ҉  आशिकी कविताएँ ҉                               ҉  Love Sayari ҉
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